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उपाकर्म 2035

आपके शहर के लिए ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद उपाकर्म की तिथियाँ

📍 बेंगलुरु, भारत
उपाकर्म · 2035
📍 बेंगलुरु, भारत
ऋग्वेद उपाकर्म
पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
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ऋग्वेद उपाकर्म
प्रथम बार
सितम्बर 14, 2035
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शुक्ल यजुर्वेद
यजुर् उपाकर्म · पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
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शुक्ल यजुर्वेद
यजुर् उपाकर्म · प्रथम बार
सितम्बर 6, 2035
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कृष्ण यजुर्वेद (बौधायन)
यजुर् उपाकर्म · पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
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कृष्ण यजुर्वेद (बौधायन)
यजुर् उपाकर्म · प्रथम बार
अगस्त 18, 2035 (parihara)
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कृष्ण यजुर्वेद (आपस्तम्ब)
यजुर् उपाकर्म · पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
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कृष्ण यजुर्वेद (आपस्तम्ब)
यजुर् उपाकर्म · प्रथम बार
अगस्त 18, 2035 (parihara)
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कृष्ण यजुर्वेद (हिरण्यकेशी)
यजुर् उपाकर्म · पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
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कृष्ण यजुर्वेद (हिरण्यकेशी)
यजुर् उपाकर्म · प्रथम बार
सितम्बर 4, 2035
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सामवेद उपाकर्म
सितम्बर 4, 2035
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सामवेद उपाकर्म (तमिल सम्प्रदाय)
सितम्बर 4, 2035
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आपके शहर के लिए ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद उपाकर्म की तिथियाँ
उपाकर्म तिथियाँ · बेंगलुरु

ऋग्वेद उपाकर्म पूरा पृष्ठ →

पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
श्रवण नक्षत्र
प्रथम बार
सितम्बर 14, 2035
श्रवण नक्षत्र
Shukra Modhyami सितम्बर 14, 2035 से पहले आरंभ हुआ, सितम्बर 1, 2035 को समाप्त
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 17
06:08:44 पूर्वाह्ण
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
अगस्त 17
12:17:34 अपराह्ण
☀️ संक्रांति
अगस्त 17
03:22:57 अपराह्ण
🌅 सूर्योदय
अगस्त 18
06:08:50 पूर्वाह्ण
⭐ नक्षत्र समाप्त
अगस्त 18
02:30:29 अपराह्ण
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 18
06:38:38 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 19
06:08:55 पूर्वाह्ण

यजुर् उपाकर्म पूरा पृष्ठ →

शुक्ल यजुर्वेद
पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
सितम्बर 6, 2035
भाद्रपद शुक्ल पंचमी
Shukra Modhyami सितम्बर 6, 2035 से पहले आरंभ हुआ, सितम्बर 1, 2035 को समाप्त
कृष्ण यजुर्वेद, बौधायन सूत्र
पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
परिहार सहित: अगस्त 18, 2035
शुक्र अस्त: उपाकर्म करने से पहले उचित उपाय के लिए कृपया अपने कुल पुरोहित (पुजारी/वाद्यार) से संपर्क करें.
विकल्प, बिना परिहार के: सितम्बर 6, 2035 (भाद्रपद शुक्ल पंचमी)
Baudhayana Sutra only allows Purnima as primary and secondary; this is given as per other Smriti granthas
कृष्ण यजुर्वेद, आपस्तम्ब सूत्र
पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
परिहार सहित: अगस्त 18, 2035
शुक्र अस्त: उपाकर्म करने से पहले उचित उपाय के लिए कृपया अपने कुल पुरोहित (पुजारी/वाद्यार) से संपर्क करें.
विकल्प, बिना परिहार के: सितम्बर 6, 2035 (भाद्रपद शुक्ल पंचमी)
Apastamba Sutra only allows Purnima as primary and secondary; this is given as per other Smriti granthas
कृष्ण यजुर्वेद, हिरण्यकेशी सूत्र
पुनरावृत्ति
अगस्त 18, 2035
श्रावण पूर्णिमा
प्रथम बार
सितम्बर 4, 2035
हस्त नक्षत्र, भाद्रपद
Shukra Modhyami सितम्बर 4, 2035 से पहले आरंभ हुआ, सितम्बर 1, 2035 को समाप्त
गायत्री जप
अगस्त 19, 2035
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 17
06:08:44 पूर्वाह्ण
🌕 पूर्णिमा शुरू
अगस्त 18
05:09:00 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
अगस्त 18
06:08:50 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 18
06:38:38 अपराह्ण
🌑 ग्रहण
अगस्त 19
06:03:13 पूर्वाह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 19
06:08:55 पूर्वाह्ण
🌖 पूर्णिमा समाप्त
अगस्त 19
06:29:48 पूर्वाह्ण

सामवेद उपाकर्म पूरा पृष्ठ →

सामवेद उपाकर्म
सितम्बर 4, 2035
भाद्रपद हस्त नक्षत्र
🌅 पिछला सूर्योदय
सितम्बर 3
06:09:42 पूर्वाह्ण
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
सितम्बर 4
02:36:31 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
सितम्बर 4
06:09:43 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
सितम्बर 4
06:28:09 अपराह्ण
⭐ नक्षत्र समाप्त
सितम्बर 5
02:32:08 पूर्वाह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
सितम्बर 5
06:09:44 पूर्वाह्ण

उपाकर्म के 48 घंटों के भीतर ग्रहण या संक्रांति

  • ☀️ सिंह संक्रांति: शुक्रवार, अगस्त 17, 2035, 3:23 PM IST · उपाकर्म से 1 पंचांग दिवस पहले (अगस्त 18, 2035)
  • 🌕 आंशिक चंद्र ग्रहण: रविवार, अगस्त 19, 2035, 4:16 AM to 9:06 AM IST · मध्य 6:41 AM · उपाकर्म के 1 पंचांग दिवस बाद (अगस्त 18, 2035) · इस शहर से दिखाई देगा
  • 🌑 आंशिक सूर्य ग्रहण: रविवार, सितम्बर 2, 2035, 6:11 AM to 6:13 AM IST · उपाकर्म से 2 पंचांग दिवस पहले (सितम्बर 4, 2035) · इस शहर से दिखाई देगा
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परिचय उपाकर्म
परिचय

उपाकर्म

उपाकर्म यज्ञोपवीत का वार्षिक नवीकरण और वेदाध्ययन का पुनरारंभ है। प्रत्येक वेद इसे अपने दिन मनाता है: ऋग्वेद उपाकर्म, यजुर् उपाकर्म (श्रावणी उपाकर्म, आवणि अवित्तम्) और सामवेद उपाकर्म।

ऊपर दी गई तिथियाँ आपके नगर और वर्ष के लिए हैं, अनुष्ठान दोहराने वालों के लिए भी और इसे पहली बार करने वालों के लिए भी। प्रत्येक वेद के पूरे पृष्ठ पर संपूर्ण तालिका दी गई है।

जहाँ विभिन्न संप्रदायों के मत भिन्न हों, वहाँ कृपया अपने परिवार या संप्रदाय की परंपरा का पालन करें।

परंपरा और विधि
⭐
ऋग्वेद उपाकर्म
श्रावण मास में श्रवण नक्षत्र पर आधारित।
🌕
यजुर् उपाकर्म
श्रावण पूर्णिमा पर आधारित, शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद के लिए।
🌾
सामवेद उपाकर्म
भाद्रपद में हस्त नक्षत्र पर आधारित।
शास्त्री जी से पूछें
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