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ॐ

सकट चौथ 2051

माघ कृष्ण चतुर्थी: संतान के कल्याण के लिए संकष्टी व्रत, जो चंद्रोदय पर खोला जाता है

📍 बेंगलुरु, भारत
सकट चौथ · 2051
📍 बेंगलुरु, भारत
जनवरी 30, 2051

उपवास: 06:47:04 AM – 09:08:25 PM.
चंद्रोदय: 09:08:25 PM.

माघ कृष्ण चतुर्थी: संतान के कल्याण के लिए संकष्टी व्रत, जो चंद्रोदय पर खोला जाता है
समय · बेंगलुरु
उपवास
06:47:04 पूर्वाह्ण
समाप्त 09:08:25 PM
चंद्रोदय
09:08:25 अपराह्ण
🌅 पिछला सूर्योदय
जनवरी 29
06:47:11 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
जनवरी 30
06:47:04 पूर्वाह्ण
🌘 चतुर्थी शुरू
जनवरी 30
07:45:59 पूर्वाह्ण
🌘 चंद्रास्त
जनवरी 30
08:48:41 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
जनवरी 30
06:18:47 अपराह्ण
🌙 चंद्रोदय
जनवरी 30
09:08:25 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
जनवरी 31
06:46:57 पूर्वाह्ण
🌒 चतुर्थी समाप्त
जनवरी 31
10:14:16 पूर्वाह्ण
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परिचय सकट चौथ
परिचय

सकट चौथ

सकट चौथ, जिसे तिलकुट चौथ भी कहते हैं, पूर्णिमांत गणना में माघ मास की संकष्टी चतुर्थी है, जो अमांत गणना में पौष की कृष्ण चतुर्थी है। यह वर्ष के सबसे व्यापक रूप से रखे जाने वाले संकष्टी व्रतों में से एक है, विशेषकर उत्तर भारत में।

माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु और कुशलता के लिए व्रत रखती हैं, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और सकट माता की पूजा करती हैं। दिन उपवास में बीतता है; संध्या को गणेश की पूजा होती है और सकट चौथ की कथा सुनाई जाती है।

चंद्रोदय के बाद, चंद्रमा के दर्शन कर उसे अर्घ्य देने पर, व्रत तोड़ा जाता है। तिल और गुड़ की मिठाइयाँ (तिलकुट) अर्पित की जाती हैं और बाँटी जाती हैं, जिससे इस दिन को इसका दूसरा नाम मिला है।

परंपरा और विधि
🌙
चंद्रोदय
चंद्रोदय पर चंद्रमा के दर्शन कर और अर्घ्य देकर व्रत तोड़ा जाता है।
🐘
गणेश और सकट माता
माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु और कुशलता के लिए इनकी पूजा करती हैं।
🍬
तिलकुट
तिल और गुड़ की मिठाइयाँ अर्पित की जाती हैं और बाँटी जाती हैं।
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