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ॐ

ऋग्वेद उपाकर्म 2027: Manchester, England

ऋग्वेदियों के लिए यज्ञोपवीत के वार्षिक नवीनीकरण की तिथि, आपके शहर के लिए

📍 Manchester, England, United Kingdom
ऋग्वेद उपाकर्म · 2027
📍 Manchester, England, United Kingdom
पुनरावृत्ति
प्रतिवर्ष करने वाला
अगस्त 16, 2027
प्रथम बार
उपनयन के बाद
अगस्त 16, 2027 (परिहार)
ऋग्वेदियों के लिए यज्ञोपवीत के वार्षिक नवीनीकरण की तिथि, आपके शहर के लिए
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ऋग्वेद उपाकर्म तिथियाँ · Manchester
पुनरावृत्ति
अगस्त 16, 2027
श्रवण नक्षत्र
प्रथम बार
परिहार सहित: अगस्त 16, 2027
गुरु अस्त: उपाकर्म करने से पहले उचित उपाय के लिए कृपया अपने कुल पुरोहित (पुजारी/वाद्यार) से संपर्क करें.
शुक्र अस्त: उपाकर्म करने से पहले उचित उपाय के लिए कृपया अपने कुल पुरोहित (पुजारी/वाद्यार) से संपर्क करें.
🌅 पिछला सूर्योदय
अगस्त 15
05:50:27 पूर्वाह्ण
⭐ नक्षत्र प्रारंभ
अगस्त 15
03:57:28 अपराह्ण
🌅 सूर्योदय
अगस्त 16
05:52:10 पूर्वाह्ण
⭐ नक्षत्र समाप्त
अगस्त 16
07:03:39 अपराह्ण
🌇 सूर्यास्त
अगस्त 16
08:35:03 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अगस्त 17
05:53:54 पूर्वाह्ण

उपाकर्म के 48 घंटों के भीतर ग्रहण या संक्रांति

  • ☀️ सिंह संक्रांति: मंगलवार, अगस्त 17, 2027, 9:37 AM BST · उपाकर्म के 1 पंचांग दिवस बाद (अगस्त 16, 2027)
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परिचय

ऋग्वेद उपाकर्म

ऋग्वेद उपाकर्म यज्ञोपवीत (पवित्र जनेऊ) का वार्षिक नवीनीकरण है, जो ऋग्वेद अनुयायी परिवारों द्वारा मनाया जाता है, और परंपरागत रूप से श्रावण शुक्ल पक्ष में श्रवण नक्षत्र पर आधारित होता है।

कालतत्त्व-विवेचन के संग्रहीत श्लोकों के अनुसार, मुख्य समय श्रवण नक्षत्र है; यदि यह उपलब्ध न हो या ग्रहण, संक्रांति, अथवा गुरु/शुक्र अस्त से बाधित हो, तो अगला विकल्प पंचमी तिथि है, फिर हस्त नक्षत्र, और यदि इनमें से कोई भी श्रावण मास में संभव न हो, तो यही क्रम भाद्रपद शुक्ल पक्ष में पुनः आज़माया जाता है।

नीचे दी गई तालिका में गणना की गई तिथि दिखाई गई है, उन दोनों के लिए जो इस व्रत को प्रतिवर्ष दोहराते हैं और उनके लिए भी जो पहली बार इसे कर रहे हैं।

परंपरा और विधि
⭐
श्रवण नक्षत्र पर आधारित
मुख्य समय श्रावण शुक्ल पक्ष में श्रवण नक्षत्र है।
🕉️
तीन समय विकल्प
श्रवण नक्षत्र, पंचमी तिथि, और हस्त नक्षत्र, इसी प्राथमिकता क्रम में।
📅
श्रावण, फिर भाद्रपद
यदि तीनों में से कोई भी श्रावण मास में उपयुक्त न हो, तो यही क्रम भाद्रपद शुक्ल पक्ष में पुनः आज़माया जाता है।
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