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ॐ

देवोत्थान एकादशी 2030

कार्तिक शुक्ल एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत, तुलसी के साथ

📍 बेंगलुरु, भारत
देवोत्थान एकादशी · 2030
📍 बेंगलुरु, भारत
नवम्बर 5, 2030
कार्तिक शुक्ल एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत, तुलसी के साथ
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समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:15:34 पूर्वाह्ण
सूर्यास्त
05:51:07 अपराह्ण
🌅 पिछला सूर्योदय
नवम्बर 4
06:15:15 पूर्वाह्ण
🌙 एकादशी प्रारंभ
नवम्बर 5
03:34:15 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
नवम्बर 5
06:15:34 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
नवम्बर 5
05:51:07 अपराह्ण
🌙 एकादशी समाप्त
नवम्बर 6
03:43:41 पूर्वाह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
नवम्बर 6
06:15:54 पूर्वाह्ण
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परिचय

देवोत्थान एकादशी

कार्तिक शुक्ल की इस एकादशी को भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से आरंभ हुई चार मास की योगनिद्रा से जागते हैं, और चातुर्मास्य समाप्त होता है। इसे प्रबोधिनी या हरिबोधिनी, अर्थात हरि का जागरण, कहते हैं।

श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वह महिमा सुनाई जो कभी ब्रह्मा ने नारद को बताई थी। ब्रह्मा ने कहा कि इस दिन का एक उपवास एक हज़ार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञों का पुण्य देता है, और हरि के भजनों और कथाओं के साथ एक रात का जागरण अनेक जन्मों के पापों को जला देता है।

ब्रह्मा ने तुलसी को विशेष स्थान दिया: कार्तिक में विष्णु को उनके पत्ते अर्पित करना, और उनके दर्शन, स्पर्श, सिंचन, रोपण और पूजन द्वारा उनकी सेवा करना स्थायी पुण्य देता है। इसी दिन से तुलसी और विष्णु का विवाह, तुलसी विवाह, मनाया जाता है, और विवाह जैसे मंगल कार्य फिर से आरंभ होते हैं।

परंपरा और विधि
🌅
विष्णु का जागरण
इस दिन भगवान अपने चार मास के विश्राम से उठते हैं।
🏁
चातुर्मास्य का समापन
देवशयनी एकादशी से आरंभ हुआ व्रतों का काल अब पूर्ण होता है।
🌿
तुलसी विवाह
इसी दिन से तुलसी और विष्णु का पवित्र विवाह मनाया जाता है।
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