मुख्य सामग्री पर जाएँ
mypanchang.com 📖 लेख
ॐ

नागुला चविति 2010

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: नाग देवताओं की पूजा

📍 बेंगलुरु, भारत
नागुला चविति · 2010
📍 बेंगलुरु, भारत
नवम्बर 9, 2010

सूर्योदय: 06:16:55 AM.
सूर्यास्त: 05:50:14 PM.
चंद्रोदय: 09:06:22 AM.
चंद्रास्त: 08:45:27 PM.

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: नाग देवताओं की पूजा
समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:16:55 पूर्वाह्ण
सूर्यास्त
05:50:14 अपराह्ण
चंद्रोदय
09:06:22 पूर्वाह्ण
चंद्रास्त
08:45:27 अपराह्ण
🌅 पिछला सूर्योदय
नवम्बर 8
06:16:34 पूर्वाह्ण
🌘 तिथि शुरू
नवम्बर 9
05:25:39 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
नवम्बर 9
06:16:55 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
नवम्बर 9
05:50:14 अपराह्ण
🌒 तिथि समाप्त
नवम्बर 10
05:12:11 पूर्वाह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
नवम्बर 10
06:17:17 पूर्वाह्ण
Advertisement
परिचय नागुला चविति
परिचय

नागुला चविति

नागुला चविति कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को पड़ने वाला एक नाग (सर्प) पूजा पर्व है, जो मुख्यतः आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में श्रावण की नाग पंचमी के कार्तिक-मास समकक्ष के रूप में मनाया जाता है। भक्त सूर्योदय से पहले उठकर बाँबी (जिसे नाग का निवास माना जाता है) या सर्प प्रतिमा के दर्शन करते हैं, दूध, हल्दी, सिंदूर और फूल अर्पित करते हैं, तथा परिवार की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है, और इस दौरान की गई नाग पूजा परिवार की वंश-परंपरा को सर्प-संबंधी अनिष्ट से सुरक्षा, संतान-समृद्धि और सामान्य कल्याण प्रदान करने वाली मानी जाती है।

सर्प स्तोत्रम्

ब्रह्मलोके च ये सर्पाः शेषनाग पुरोगमाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १ ॥

विष्णुलोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ २ ॥

रुद्रलोके च ये सर्पास्तक्षक प्रमुखास्तथा ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ३ ॥

खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गं ये च समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ४ ॥

सर्पसत्रे च ये सर्पाः आस्तीकेन च रक्षिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ५ ॥

मलये चैव ये सर्पाः कार्कोटप्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ६ ॥

धर्मलोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ७ ॥

समुद्रे चैव ये सर्पाः पाताले चैव संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ८ ॥

ये सर्पाः पर्वताग्रेषु दरीसन्धिषु संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ९ ॥

ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति हि ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १० ॥

पृथिव्यां चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिलसंस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ११ ॥

रसातले च ये सर्पाः अनन्ताद्याः महाविषाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १२ ॥
सर्प स्तोत्रम्
परंपरा और विधि
🐍
नाग पूजा
भक्त सूर्योदय से पहले बाँबी या सर्प प्रतिमा पर दूध, हल्दी और फूल अर्पित करते हैं, सर्प-संबंधी अनिष्ट से सुरक्षा और परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
📅
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र महीनों में से एक है।
शुभ समय

चौघड़िया मुहूर्त

चौघड़ियासेतक
लाभ नवम्बर/9/2010 10:36:55 AM नवम्बर/9/2010 12:03:34 PM
लाभ नवम्बर/9/2010 07:23:37 PM नवम्बर/9/2010 08:57:00 PM
शुभ नवम्बर/9/2010 10:30:23 PM नवम्बर/10/2010 12:03:45 AM
अमृत नवम्बर/10/2010 12:03:45 AM नवम्बर/10/2010 01:37:08 AM
चल नवम्बर/10/2010 01:37:08 AM नवम्बर/10/2010 03:10:31 AM
गौरी पंचांग
दिन
लाभम नवम्बर/9/2010 07:43:35 AM – नवम्बर/9/2010 08:35:35 AM
सुगम नवम्बर/9/2010 10:36:55 AM – नवम्बर/9/2010 12:03:34 PM
उत्ती नवम्बर/9/2010 01:30:14 PM – नवम्बर/9/2010 02:56:54 PM
अमृता नवम्बर/9/2010 04:23:34 PM – नवम्बर/9/2010 05:50:14 PM
रात
उत्ती नवम्बर/9/2010 07:23:37 PM – नवम्बर/9/2010 08:57:00 PM
अमृता नवम्बर/9/2010 10:30:23 PM – नवम्बर/10/2010 12:03:45 AM
लाभम नवम्बर/10/2010 01:37:08 AM – नवम्बर/10/2010 03:10:31 AM
धनम नवम्बर/10/2010 03:10:31 AM – नवम्बर/10/2010 04:43:54 AM
सुगम नवम्बर/10/2010 04:43:54 AM – नवम्बर/10/2010 06:17:17 AM
शास्त्री जी से पूछें
💬 पंचांग चैट खोलें
Advertisement

आज का पंचांग, त्योहार, मुहूर्त और बहुत कुछ देखें

🕉 पंचांग चैट खोलें
भाषा चुनें
लोड हो रहा है…
स्थान बदलें