नागुला चविति 1986
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: नाग देवताओं की पूजा
सूर्योदय: 07:07:05 AM.
सूर्यास्त: 05:24:38 PM.
चंद्रोदय: 11:22:49 AM.
चंद्रास्त: 08:10:16 PM.
परिचय नागुला चविति
नागुला चविति
नागुला चविति कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को पड़ने वाला एक नाग (सर्प) पूजा पर्व है, जो मुख्यतः आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में श्रावण की नाग पंचमी के कार्तिक-मास समकक्ष के रूप में मनाया जाता है। भक्त सूर्योदय से पहले उठकर बाँबी (जिसे नाग का निवास माना जाता है) या सर्प प्रतिमा के दर्शन करते हैं, दूध, हल्दी, सिंदूर और फूल अर्पित करते हैं, तथा परिवार की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है, और इस दौरान की गई नाग पूजा परिवार की वंश-परंपरा को सर्प-संबंधी अनिष्ट से सुरक्षा, संतान-समृद्धि और सामान्य कल्याण प्रदान करने वाली मानी जाती है।
ब्रह्मलोके च ये सर्पाः शेषनाग पुरोगमाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १ ॥
विष्णुलोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ २ ॥
रुद्रलोके च ये सर्पास्तक्षक प्रमुखास्तथा ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ३ ॥
खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गं ये च समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ४ ॥
सर्पसत्रे च ये सर्पाः आस्तीकेन च रक्षिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ५ ॥
मलये चैव ये सर्पाः कार्कोटप्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ६ ॥
धर्मलोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ७ ॥
समुद्रे चैव ये सर्पाः पाताले चैव संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ८ ॥
ये सर्पाः पर्वताग्रेषु दरीसन्धिषु संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ९ ॥
ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति हि ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १० ॥
पृथिव्यां चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिलसंस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ११ ॥
रसातले च ये सर्पाः अनन्ताद्याः महाविषाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १२ ॥
चौघड़िया मुहूर्त
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | नवम्बर/5/1986 07:07:05 AM | नवम्बर/5/1986 08:24:16 AM |
| चल | नवम्बर/5/1986 02:50:14 PM | नवम्बर/5/1986 04:07:26 PM |
| लाभ | नवम्बर/5/1986 04:07:26 PM | नवम्बर/5/1986 05:24:38 PM |
| शुभ | नवम्बर/5/1986 07:07:35 PM | नवम्बर/5/1986 08:50:32 PM |
| अमृत | नवम्बर/5/1986 08:50:32 PM | नवम्बर/5/1986 10:33:29 PM |
| चल | नवम्बर/5/1986 10:33:29 PM | नवम्बर/6/1986 12:16:26 AM |
| लाभ | नवम्बर/6/1986 03:42:20 AM | नवम्बर/6/1986 05:25:17 AM |
| लाभम | नवम्बर/5/1986 07:07:05 AM – नवम्बर/5/1986 08:24:16 AM | |
| सुगम | नवम्बर/5/1986 09:41:28 AM – नवम्बर/5/1986 10:58:39 AM | |
| उत्ती | नवम्बर/5/1986 01:33:03 PM – नवम्बर/5/1986 02:50:14 PM | |
| अमृता | नवम्बर/5/1986 02:50:14 PM – नवम्बर/5/1986 04:07:26 PM |
| उत्ती | नवम्बर/5/1986 05:24:38 PM – नवम्बर/5/1986 07:07:35 PM | |
| अमृता | नवम्बर/5/1986 07:07:35 PM – नवम्बर/5/1986 08:50:32 PM | |
| लाभम | नवम्बर/5/1986 10:33:29 PM – नवम्बर/6/1986 12:16:26 AM | |
| धनम | नवम्बर/6/1986 12:16:26 AM – नवम्बर/6/1986 01:59:23 AM | |
| सुगम | नवम्बर/6/1986 01:59:23 AM – नवम्बर/6/1986 03:42:20 AM |
आज का पंचांग, त्योहार, मुहूर्त और बहुत कुछ देखें
🕉 पंचांग चैट खोलें