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ॐ

नागुला चविति 1952

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: नाग देवताओं की पूजा

📍 Columbus, Ohio, America (United States)
नागुला चविति · 1952
📍 Columbus, Ohio, America (United States)
अक्तूबर 22, 1952

सूर्योदय: 06:51:38 AM.
सूर्यास्त: 05:41:46 PM.
चंद्रोदय: 10:59:12 AM.
चंद्रास्त: 07:56:16 PM.

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: नाग देवताओं की पूजा
समय · Columbus
सूर्योदय
06:51:38 पूर्वाह्ण
सूर्यास्त
05:41:46 अपराह्ण
चंद्रोदय
10:59:12 पूर्वाह्ण
चंद्रास्त
07:56:16 अपराह्ण
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 21
06:50:32 पूर्वाह्ण
🌘 तिथि शुरू
अक्तूबर 21
05:12:33 अपराह्ण
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 22
06:51:38 पूर्वाह्ण
🌒 तिथि समाप्त
अक्तूबर 22
04:18:02 अपराह्ण
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 22
05:41:46 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 23
06:52:43 पूर्वाह्ण
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इस दिन का पंचांग · Columbus
🌓 तिथि
चतुर्थी
⭐ नक्षत्र
ज्येष्ठा
🔯 योग
शोभन
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परिचय नागुला चविति
परिचय

नागुला चविति

नागुला चविति कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को पड़ने वाला एक नाग (सर्प) पूजा पर्व है, जो मुख्यतः आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में श्रावण की नाग पंचमी के कार्तिक-मास समकक्ष के रूप में मनाया जाता है। भक्त सूर्योदय से पहले उठकर बाँबी (जिसे नाग का निवास माना जाता है) या सर्प प्रतिमा के दर्शन करते हैं, दूध, हल्दी, सिंदूर और फूल अर्पित करते हैं, तथा परिवार की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है, और इस दौरान की गई नाग पूजा परिवार की वंश-परंपरा को सर्प-संबंधी अनिष्ट से सुरक्षा, संतान-समृद्धि और सामान्य कल्याण प्रदान करने वाली मानी जाती है।

सर्प स्तोत्रम्

ब्रह्मलोके च ये सर्पाः शेषनाग पुरोगमाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १ ॥

विष्णुलोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ २ ॥

रुद्रलोके च ये सर्पास्तक्षक प्रमुखास्तथा ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ३ ॥

खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गं ये च समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ४ ॥

सर्पसत्रे च ये सर्पाः आस्तीकेन च रक्षिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ५ ॥

मलये चैव ये सर्पाः कार्कोटप्रमुखाश्च ये ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ६ ॥

धर्मलोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ७ ॥

समुद्रे चैव ये सर्पाः पाताले चैव संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ८ ॥

ये सर्पाः पर्वताग्रेषु दरीसन्धिषु संस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ९ ॥

ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति हि ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १० ॥

पृथिव्यां चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिलसंस्थिताः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ ११ ॥

रसातले च ये सर्पाः अनन्ताद्याः महाविषाः ।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥ १२ ॥
सर्प स्तोत्रम्
परंपरा और विधि
🐍
नाग पूजा
भक्त सूर्योदय से पहले बाँबी या सर्प प्रतिमा पर दूध, हल्दी और फूल अर्पित करते हैं, सर्प-संबंधी अनिष्ट से सुरक्षा और परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
📅
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र महीनों में से एक है।
शुभ समय

चौघड़िया मुहूर्त

चौघड़ियासेतक
लाभ अक्तूबर/22/1952 06:51:38 AM अक्तूबर/22/1952 08:12:54 AM
चल अक्तूबर/22/1952 02:59:14 PM अक्तूबर/22/1952 04:20:30 PM
लाभ अक्तूबर/22/1952 04:20:30 PM अक्तूबर/22/1952 05:41:46 PM
शुभ अक्तूबर/22/1952 07:20:38 PM अक्तूबर/22/1952 08:59:30 PM
अमृत अक्तूबर/22/1952 08:59:30 PM अक्तूबर/22/1952 10:38:22 PM
चल अक्तूबर/22/1952 10:38:22 PM अक्तूबर/23/1952 12:17:15 AM
लाभ अक्तूबर/23/1952 03:34:59 AM अक्तूबर/23/1952 05:13:51 AM
गौरी पंचांग
दिन
लाभम अक्तूबर/22/1952 06:51:38 AM – अक्तूबर/22/1952 08:12:54 AM
सुगम अक्तूबर/22/1952 09:34:10 AM – अक्तूबर/22/1952 10:55:26 AM
उत्ती अक्तूबर/22/1952 01:37:58 PM – अक्तूबर/22/1952 02:59:14 PM
अमृता अक्तूबर/22/1952 02:59:14 PM – अक्तूबर/22/1952 04:20:30 PM
रात
उत्ती अक्तूबर/22/1952 05:41:46 PM – अक्तूबर/22/1952 07:20:38 PM
अमृता अक्तूबर/22/1952 07:20:38 PM – अक्तूबर/22/1952 08:59:30 PM
लाभम अक्तूबर/22/1952 10:38:22 PM – अक्तूबर/23/1952 12:17:15 AM
धनम अक्तूबर/23/1952 12:17:15 AM – अक्तूबर/23/1952 01:56:07 AM
सुगम अक्तूबर/23/1952 01:56:07 AM – अक्तूबर/23/1952 03:34:59 AM
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