मार्गळी 1870
पवित्र महिना: पहाटे तिरुप्पावै, कोलम आणि भजने
सूर्योदय: 07:51:52 AM.
| मार्गळी | तारीख | पाशुरम् | सूर्योदय | सण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बुधवार, डिसेंबर 14, 1870 | 1 | 07:51:52 म.पू. | |
| 2 | गुरुवार, डिसेंबर 15, 1870 | 2 | 07:52:34 म.पू. | |
| 3 | शुक्रवार, डिसेंबर 16, 1870 | 3 | 07:53:15 म.पू. | |
| 4 | शनिवार, डिसेंबर 17, 1870 | 4 | 07:53:54 म.पू. | |
| 5 | रविवार, डिसेंबर 18, 1870 | 5 | 07:54:31 म.पू. | |
| 6 | सोमवार, डिसेंबर 19, 1870 | 6 | 07:55:06 म.पू. | |
| 7 | मंगळवार, डिसेंबर 20, 1870 | 7 | 07:55:39 म.पू. | |
| 8 | बुधवार, डिसेंबर 21, 1870 | 8 | 07:56:11 म.पू. | तमिळ हनुमान जयंती |
| 9 | गुरुवार, डिसेंबर 22, 1870 | 9 | 07:56:40 म.पू. | |
| 10 | शुक्रवार, डिसेंबर 23, 1870 | 10 | 07:57:08 म.पू. | |
| 11 | शनिवार, डिसेंबर 24, 1870 | 11 | 07:57:33 म.पू. | |
| 12 | रविवार, डिसेंबर 25, 1870 | 12 | 07:57:57 म.पू. | |
| 13 | सोमवार, डिसेंबर 26, 1870 | 13 | 07:58:18 म.पू. | |
| 14 | मंगळवार, डिसेंबर 27, 1870 | 14 | 07:58:38 म.पू. | |
| 15 | बुधवार, डिसेंबर 28, 1870 | 15 | 07:58:55 म.पू. | |
| 16 | गुरुवार, डिसेंबर 29, 1870 | 16 | 07:59:10 म.पू. | |
| 17 | शुक्रवार, डिसेंबर 30, 1870 | 17 | 07:59:23 म.पू. | |
| 18 | शनिवार, डिसेंबर 31, 1870 | 18 | 07:59:33 म.पू. | |
| 19 | रविवार, जानेवारी 1, 1871 | 19 | 07:59:42 म.पू. | |
| 20 | सोमवार, जानेवारी 2, 1871 | 20 | 07:59:48 म.पू. | |
| 21 | मंगळवार, जानेवारी 3, 1871 | 21 | 07:59:52 म.पू. | |
| 22 | बुधवार, जानेवारी 4, 1871 | 22 | 07:59:54 म.पू. | |
| 23 | गुरुवार, जानेवारी 5, 1871 | 23 | 07:59:53 म.पू. | आरुद्रा दर्शनम |
| 24 | शुक्रवार, जानेवारी 6, 1871 | 24 | 07:59:51 म.पू. | |
| 25 | शनिवार, जानेवारी 7, 1871 | 25 | 07:59:46 म.पू. | |
| 26 | रविवार, जानेवारी 8, 1871 | 26 | 07:59:39 म.पू. | |
| 27 | सोमवार, जानेवारी 9, 1871 | 27 | 07:59:29 म.पू. | |
| 28 | मंगळवार, जानेवारी 10, 1871 | 28 | 07:59:18 म.पू. | |
| 29 | बुधवार, जानेवारी 11, 1871 | 29 | 07:59:04 म.पू. | भोगी |
परिचय मार्गळी
मार्गळी
मार्गळी (மார்கழி) हा सूर्य धनु राशीत असतानाचा तमिळ महिना, म्हणजे धनुर्मास आहे. गीतेत श्रीकृष्ण म्हणतात, "महिन्यांमध्ये मी मार्गशीर्ष आहे", आणि संपूर्ण महिना पहाटेपूर्वीच्या उपासनेला वाहिलेला असतो.
ब्राह्ममुहूर्तावर स्त्रिया दारासमोर मोठ्या रांगोळ्या (कोलम) काढतात, भजनी मंडळे गात गात रस्त्यांतून फिरतात, आणि मंदिरे विशेष पहाटेच्या पूजेसाठी लवकर उघडतात. दररोज आण्डाळच्या तिरुप्पावैतील एक पद गायले जाते, तीस दिवसांसाठी तीस पदे, आणि तिरुप्पळ्ळियेळुच्चीसह माणिक्कवासगरांच्या तिरुवेम्पावैतीलही एक पद गायले जाते.
या महिन्यात वैकुंठ एकादशी येते, जेव्हा श्रीरंगम येथे स्वर्गाचे द्वार उघडते, चिदंबरम येथे भगवान नटराजांचे आरुद्रा दर्शन होते, आणि हनुमान जयंती येते. चेन्नईचा संगीत आणि नृत्याचा हंगाम संपूर्ण महिना भरून टाकतो, आणि थाई पोंगलच्या आदल्या दिवशी, भोगीने, मार्गळीची सांगता होते.
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