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ॐ

मार्गळि 1908

पवित्र मास: भोर में तिरुप्पावै, कोलम और भजन

📍 बेंगलुरु, भारत
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मार्गळि: दिन प्रतिदिन · बेंगलुरु
मार्गळितारीखपाशुरम्सूर्योदयत्योहार
1मंगलवार, दिसम्बर 15, 1908106:34:49 पूर्वाह्ण
2बुधवार, दिसम्बर 16, 1908206:35:22 पूर्वाह्ण
3गुरुवार, दिसम्बर 17, 1908306:35:54 पूर्वाह्ण
4शुक्रवार, दिसम्बर 18, 1908406:36:25 पूर्वाह्ण
5शनिवार, दिसम्बर 19, 1908506:36:57 पूर्वाह्ण
6रविवार, दिसम्बर 20, 1908606:37:28 पूर्वाह्ण
7सोमवार, दिसम्बर 21, 1908706:37:58 पूर्वाह्ण
8मंगलवार, दिसम्बर 22, 1908806:38:28 पूर्वाह्ण
9बुधवार, दिसम्बर 23, 1908906:38:58 पूर्वाह्णतमिल हनुमान जयंती
10गुरुवार, दिसम्बर 24, 19081006:39:27 पूर्वाह्ण
11शुक्रवार, दिसम्बर 25, 19081106:39:56 पूर्वाह्ण
12शनिवार, दिसम्बर 26, 19081206:40:24 पूर्वाह्ण
13रविवार, दिसम्बर 27, 19081306:40:51 पूर्वाह्ण
14सोमवार, दिसम्बर 28, 19081406:41:18 पूर्वाह्ण
15मंगलवार, दिसम्बर 29, 19081506:41:44 पूर्वाह्ण
16बुधवार, दिसम्बर 30, 19081606:42:09 पूर्वाह्ण
17गुरुवार, दिसम्बर 31, 19081706:42:34 पूर्वाह्ण
18शुक्रवार, जनवरी 1, 19091806:42:58 पूर्वाह्ण
19शनिवार, जनवरी 2, 19091906:43:21 पूर्वाह्ण
20रविवार, जनवरी 3, 19092006:43:43 पूर्वाह्ण
21सोमवार, जनवरी 4, 19092106:44:05 पूर्वाह्ण
22मंगलवार, जनवरी 5, 19092206:44:25 पूर्वाह्ण
23बुधवार, जनवरी 6, 19092306:44:45 पूर्वाह्णआरुद्रा दर्शनम्
24गुरुवार, जनवरी 7, 19092406:45:04 पूर्वाह्ण
25शुक्रवार, जनवरी 8, 19092506:45:21 पूर्वाह्ण
26शनिवार, जनवरी 9, 19092606:45:38 पूर्वाह्ण
27रविवार, जनवरी 10, 19092706:45:54 पूर्वाह्ण
28सोमवार, जनवरी 11, 19092806:46:09 पूर्वाह्ण
29मंगलवार, जनवरी 12, 19092906:46:23 पूर्वाह्णभोगी
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परिचय

मार्गळि

मार्गळि (மார்கழி) वह तमिल मास है जब सूर्य धनु राशि में होते हैं, अर्थात धनुर्मास। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं “मासों में मैं मार्गशीर्ष हूँ”, और पूरा मास भोर से पहले की उपासना को समर्पित रहता है।

ब्रह्म मुहूर्त में स्त्रियाँ द्वार पर बड़े बड़े कोलम् बनाती हैं, भजन मंडलियाँ गाते हुए गलियों में घूमती हैं, और मंदिर भोर की विशेष पूजा के लिए जल्दी खुलते हैं। प्रतिदिन आण्डाल के तिरुप्पावै का एक पद गाया जाता है, तीस दिनों के लिए तीस पद, और साथ ही तिरुप्पळ्ळियेऴुच्चि सहित माणिक्कवासगर के तिरुवेम्पावै का भी।

इसी मास में वैकुंठ एकादशी आती है, जब श्रीरंगम में स्वर्ग का द्वार खुलता है, चिदंबरम में भगवान नटराज का आरुद्रा दर्शनम् होता है, और हनुमान जयंती भी। चेन्नई का संगीत और नृत्य का मौसम पूरे मास छाया रहता है, और मार्गळि थाई पोंगल की पूर्व संध्या, भोगी, के साथ समाप्त होता है।

परंपरा और विधि
🌸
भोर में कोलम्
प्रातःकाल हर द्वार पर बड़े बड़े कोलम् बनाए जाते हैं।
📖
तिरुप्पावै
प्रतिदिन आण्डाल के तिरुप्पावै का एक पाशुरम् और तिरुवेम्पावै का एक पद।
🎶
संगीत का मौसम
चेन्नई के संगीत समारोह और नृत्य पूरे मास छाए रहते हैं।
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