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ॐ

मणवाळ मामुनिगल् तिरुनक्षत्रम् 1898

अइप्पसी मूलम: मणवाळ मामुनिगल् का जन्म नक्षत्र

📍 बेंगलुरु, भारत
मणवाळ मामुनिगल् तिरुनक्षत्रम् · 1898
📍 बेंगलुरु, भारत
गुरुवार, अक्तूबर 20, 1898
अइप्पसी मूलम: मणवाळ मामुनिगल् का जन्म नक्षत्र
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समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:02:53 पूर्वाह्ण
सूर्यास्त
05:48:41 अपराह्ण
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परिचय

मणवाळ मामुनिगल् तिरुनक्षत्रम्

मणवाळ मामुनिगल्, जिन्हें रम्य जामातृ मुनि और पेरिय जीयर भी कहते हैं, का जन्म 1370 में आऴ्वार्तिरुनगरी में तमिल मास ऐप्पसि में मूल नक्षत्र पर हुआ। श्रीवैष्णव उन्हें वह महापुरुष मानते हैं जिनमें श्री रामानुज पुनः अवतरित हुए।

उन्होंने अपना जीवन श्रीरंगम में आऴ्वारों और आचार्यों की कृतियों की शिक्षा देने और उन पर व्याख्याएँ लिखने में बिताया। परंपरा के अनुसार, नम्माऴ्वार की तिरुवाय्मोऴि की महान व्याख्या ईडु पर उनके वर्ष भर के प्रवचनों के अंत में स्वयं भगवान रंगनाथ बालक के रूप में आए और उन्हें "श्रीशैलेश दयापात्रं" तनियन प्रदान किया, जो तब से दिव्य प्रबंधम् के आरंभ में पढ़ा जाता है।

उनके तिरुनक्षत्रम् पर श्रीरंगम, आऴ्वार्तिरुनगरी और कांचीपुरम में उनकी सन्निधियों में विशेष पूजा और पाठ होता है।

परंपरा और विधि
📿
पेरिय जीयर
श्रीवैष्णवों द्वारा पुनः अवतरित श्री रामानुज के रूप में पूजित।
📖
ईडु
श्रीरंगम में तिरुवाय्मोऴि की ईडु व्याख्या पर उनके प्रवचन।
🙏
श्रीशैलेश दयापात्रं
श्रीरंगम में उन्हें प्रदान किया गया तनियन दिव्य प्रबंधम् के पाठ का आरंभ करता है।
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