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ॐ

भीष्म (जया) एकादशी 1983

माघ शुक्ल एकादशी: भगवान विष्णु को समर्पित व्रत

📍 बेंगलुरु, भारत
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समय · बेंगलुरु
सूर्योदय
06:47:35 पूर्वाह्ण
सूर्यास्त
06:16:24 अपराह्ण
🌅 पिछला सूर्योदय
जनवरी 24
06:47:35 पूर्वाह्ण
🌙 एकादशी प्रारंभ
जनवरी 24
08:02:35 अपराह्ण
🌅 सूर्योदय
जनवरी 25
06:47:35 पूर्वाह्ण
🌙 एकादशी समाप्त
जनवरी 25
05:39:38 अपराह्ण
🌇 सूर्यास्त
जनवरी 25
06:16:24 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
जनवरी 26
06:47:34 पूर्वाह्ण
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परिचय

भीष्म (जया) एकादशी

श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को नंदन वन में इंद्र की सभा के उस समय के विषय में बताया, जब गंधर्व गायक माल्यवान और एक दिव्य नर्तकी साथ साथ प्रस्तुति दे रहे थे। एक दूसरे के प्रेम में खोकर वे बेसुरा गाने और बेताल नाचने लगे।

उनका ध्यान भटका देखकर इंद्र ने उन्हें पिशाच बनकर धरती पर गिरने का शाप दे दिया। उन्होंने स्वयं को हिमालय के एक ठंडे शिखर पर पाया, जहाँ वे भूख, ठंड और पश्चाताप से पीड़ित रहे। माघ शुक्ल की एकादशी को वे इतने दुखी थे कि उन्होंने कुछ नहीं खाया, कड़कड़ाती रात भर जागते रहे, और अपने दोष पर पश्चाताप किया।

अनजाने में ही उन्होंने जया एकादशी का उपवास और जागरण कर लिया था। द्वादशी की भोर तक विष्णु की कृपा से वे शाप से मुक्त हो गए, अपने दिव्य रूप फिर से पा गए और स्वर्ग लौट गए, जहाँ स्वयं इंद्र ने भी उनका सम्मान किया। अनेक प्रदेशों में यह दिन भीष्म के स्मरण के साथ भी मनाया जाता है, जिनकी अष्टमी इसके ठीक पहले पड़ती है।

परंपरा और विधि
🏆
जया, विजय देने वाली
यह उपवास पाप पर और शाप के दुर्भाग्य पर विजय दिलाता है।
🎶
माल्यवान की मुक्ति
शापित गंधर्व युगल ने इसके पुण्य से अपने दिव्य रूप फिर से पाए।
🏹
भीष्म के दिन
भीष्म अष्टमी के ठीक बाद आने के कारण इसे उनके स्मरण के साथ मनाया जाता है।
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