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गुग्गा नवमी 1988

श्रावण कृष्ण नवमी (पूर्णिमांत में भाद्रपद कृष्ण नवमी): सर्पदंश से रक्षा करने वाले गोगाजी का सम्मान

📍 बेंगलुरु, भारत
गुग्गा नवमी · 1988
📍 बेंगलुरु, भारत
रविवार, सितम्बर 4, 1988
श्रावण कृष्ण नवमी (पूर्णिमांत में भाद्रपद कृष्ण नवमी): सर्पदंश से रक्षा करने वाले गोगाजी का सम्मान
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परिचय

गुग्गा नवमी

गुग्गा नवमी (जिसे गोगा नवमी भी कहा जाता है) अमांत पंचांग के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है (पूर्णिमांत पंचांग में इसी तिथि को भाद्रपद कृष्ण नवमी कहा जाता है)।

यह दिन गोगाजी को समर्पित है, जिन्हें गुग्गा पीर या जाहरवीर गोगाजी के नाम से भी जाना जाता है, एक लोकदेवता जिनकी पूजा उत्तर भारत में, मुख्यतः राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में, सर्पदंश से रक्षा करने वाले देवता के रूप में की जाती है।

परंपरा और विधि
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श्रावण कृष्ण नवमी
अमांत पंचांग के अनुसार; पूर्णिमांत पंचांग में इसी तिथि को भाद्रपद कृष्ण नवमी कहा जाता है।
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सर्पदंश से रक्षा
गोगाजी (गुग्गा पीर / जाहरवीर गोगाजी) को भक्तों की सर्पदंश से रक्षा करने वाले लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है।
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उत्तर भारत का पर्व
मुख्यतः राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है।
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