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ॐ

धनतेरस 2147

अमांत आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी): धन्वंतरि जयंती और लक्ष्मी पूजा

अन्य नाम: धनत्रयोदशी

📍 Columbus, Ohio, America (United States)
धनतेरस · 2147
📍 Columbus, Ohio, America (United States)
अक्तूबर 21, 2147

स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल: 07:57:53 PM – 09:21:02 PM.

अमांत आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी): धन्वंतरि जयंती और लक्ष्मी पूजा
दिवाली सप्ताह, दिन प्रतिदिन · Columbus
🏅
धनतेरस
🗓 अक्तूबर 21, 2147
🔔 धनतेरस, यम दीप दान, 🔱 प्रदोष, शनि प्रदोष
🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): अक्तूबर/21 07:57:53 PM – अक्तूबर/21 09:21:02 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल: वृषभ स्थिर लग्न
अक्तूबर/21 07:57:53 PM
समाप्त अक्तूबर/21 09:21:02 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 20
07:49:06 पूर्वाह्ण
🌘 त्रयोदशी शुरू
अक्तूबर 21
07:26:39 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 21
07:50:10 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 21
06:43:28 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 22
07:51:15 पूर्वाह्ण
🌘 त्रयोदशी समाप्त
अक्तूबर 22
09:38:16 पूर्वाह्ण
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकअक्तूबर/21 10:15:22 AMअक्तूबर/21 12:39:43 PM
कुंभअक्तूबर/21 04:08:53 PMअक्तूबर/21 05:22:19 PM
वृषभअक्तूबर/21 07:57:53 PMअक्तूबर/21 09:48:29 PM
चौघड़ियासेतक
शुभअक्तूबर/21 09:17:17 AMअक्तूबर/21 10:33:30 AM
चलअक्तूबर/21 01:16:49 PMअक्तूबर/21 02:38:29 PM
अमृतअक्तूबर/21 04:00:09 PMअक्तूबर/21 05:21:49 PM
लाभअक्तूबर/21 06:43:28 PMअक्तूबर/21 08:21:57 PM
शुभअक्तूबर/21 10:00:25 PMअक्तूबर/21 11:38:53 PM
अमृतअक्तूबर/21 11:38:53 PMअक्तूबर/22 01:17:22 AM
चलअक्तूबर/22 01:17:22 AMअक्तूबर/22 02:55:50 AM
लाभअक्तूबर/22 06:12:47 AMअक्तूबर/22 07:51:15 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌑
काली चौदस
🗓 अक्तूबर 22, 2147
🔔 हनुमान जयंती, काली चौदस, मास शिवरात्रि
🕉 निशीथ काल (काली पूजा): अक्तूबर/23 12:50:52 AM – अक्तूबर/23 01:43:33 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
निशीथ काल (काली पूजा)
अक्तूबर/23 12:50:52 AM
समाप्त अक्तूबर/23 01:43:33 AM
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 21
07:50:10 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 22
07:51:15 पूर्वाह्ण
🌘 चतुर्दशी शुरू
अक्तूबर 22
09:38:16 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 22
06:42:05 अपराह्ण
🕛 मध्यरात्रि मुहूर्त
अक्तूबर 23
12:50:52 AM – 01:43:33 AM
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 23
07:52:20 पूर्वाह्ण
🌑 चतुर्दशी समाप्त
अक्तूबर 23
11:23:23 पूर्वाह्ण
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🪔
नरक चतुर्दशी
🗓 अक्तूबर 23, 2147
🔔 नरक चतुर्दशी, दीपावली, अमावस्या तर्पण, अन्वाधान
🕉 अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय): 07:35:52 AM – 07:52:20 AM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय)
07:35:52 पूर्वाह्ण
समाप्त 07:52:20 AM
🌘 चतुर्दशी शुरू
अक्तूबर 22
09:38:16 पूर्वाह्ण
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 23
07:52:20 पूर्वाह्ण
🌑 चतुर्दशी समाप्त
अक्तूबर 23
11:23:23 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 24
07:53:25 पूर्वाह्ण
🌙 चंद्रोदय
अक्तूबर 24
08:35:41 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 24
06:39:20 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 25
07:54:31 पूर्वाह्ण
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✨
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)
🗓 अक्तूबर 23, 2147
🔔 नरक चतुर्दशी, दीपावली, अमावस्या तर्पण, अन्वाधान
🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): अक्तूबर/23 07:50:01 PM – अक्तूबर/23 09:19:14 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल: वृषभ स्थिर लग्न
अक्तूबर/23 07:50:01 PM
समाप्त अक्तूबर/23 09:19:14 PM
निशीथ काल (मध्यरात्रि)
अक्तूबर/24 12:50:38 AM
समाप्त अक्तूबर/24 01:43:29 AM
चोपड़ा पूजन (नई बहीखाता)
अक्तूबर/23 07:50:01 PM
समाप्त अक्तूबर/23 09:19:14 PM
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 22
07:51:15 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 23
07:52:20 पूर्वाह्ण
🌑 अमावस्या शुरू
अक्तूबर 23
11:23:23 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 23
06:40:42 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 24
07:53:25 पूर्वाह्ण
🌒 अमावस्या समाप्त
अक्तूबर 24
12:39:23 अपराह्ण
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकअक्तूबर/24 10:03:34 AMअक्तूबर/24 12:27:55 PM
कुंभअक्तूबर/24 03:57:05 PMअक्तूबर/24 05:10:31 PM
वृषभअक्तूबर/24 07:46:05 PMअक्तूबर/24 09:36:42 PM
चौघड़ियासेतक
लाभअक्तूबर/24 11:55:38 AMअक्तूबर/24 01:16:23 PM
लाभअक्तूबर/24 08:18:44 PMअक्तूबर/24 09:58:08 PM
शुभअक्तूबर/24 11:37:32 PMअक्तूबर/25 01:16:55 AM
अमृतअक्तूबर/25 01:16:55 AMअक्तूबर/25 02:56:19 AM
चलअक्तूबर/25 02:56:19 AMअक्तूबर/25 04:35:43 AM
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📒
बलि प्रतिपदा
🗓 अक्तूबर 24, 2147
🔔 गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा, इष्टि
🕉 लाभ चौघड़िया (मिति मुहूर्त): अक्तूबर/24 11:55:38 AM – अक्तूबर/24 01:16:23 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
स्थिर लग्नसेतक
वृश्चिकअक्तूबर/24 10:03:34 AMअक्तूबर/24 12:27:55 PM
कुंभअक्तूबर/24 03:57:05 PMअक्तूबर/24 05:10:31 PM
वृषभअक्तूबर/24 07:46:05 PMअक्तूबर/24 09:36:42 PM
चौघड़ियासेतक
लाभअक्तूबर/24 11:55:38 AMअक्तूबर/24 01:16:23 PM
लाभअक्तूबर/24 08:18:44 PMअक्तूबर/24 09:58:08 PM
शुभअक्तूबर/24 11:37:32 PMअक्तूबर/25 01:16:55 AM
अमृतअक्तूबर/25 01:16:55 AMअक्तूबर/25 02:56:19 AM
चलअक्तूबर/25 02:56:19 AMअक्तूबर/25 04:35:43 AM
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👫
यम द्वितीया / भैया दूज
🗓 अक्तूबर 25, 2147
🔔 गुजराती नव वर्ष, यम द्वितीया / भाई दूज, गुरु अस्त समाप्त
🕉 अपराह्ण काल: अक्तूबर/25 02:20:36 PM – अक्तूबर/25 04:29:18 PM
▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
अपराह्ण काल
अक्तूबर/25 02:20:36 PM
समाप्त अक्तूबर/25 04:29:18 PM
चौघड़ियासेतक
लाभअक्तूबर/25 07:54:31 AMअक्तूबर/25 09:14:57 AM
चलअक्तूबर/25 03:57:07 PMअक्तूबर/25 05:17:33 PM
लाभअक्तूबर/25 05:17:33 PMअक्तूबर/25 06:37:59 PM
शुभअक्तूबर/25 08:17:42 PMअक्तूबर/25 09:57:24 PM
अमृतअक्तूबर/25 09:57:24 PMअक्तूबर/25 11:37:06 PM
चलअक्तूबर/25 11:37:06 PMअक्तूबर/26 01:16:48 AM
लाभअक्तूबर/26 04:36:13 AMअक्तूबर/26 06:15:55 AM
इस दिन का पूरा पंचांग देखें →
🌅 पिछला सूर्योदय
अक्तूबर 20
07:49:06 पूर्वाह्ण
🌘 तिथि शुरू
अक्तूबर 21
07:26:39 पूर्वाह्ण
🌅 सूर्योदय
अक्तूबर 21
07:50:10 पूर्वाह्ण
🌇 सूर्यास्त
अक्तूबर 21
06:43:28 अपराह्ण
🌅 अगला सूर्योदय
अक्तूबर 22
07:51:15 पूर्वाह्ण
🌒 तिथि समाप्त
अक्तूबर 22
09:38:16 पूर्वाह्ण
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इस दिन का पंचांग · Columbus
🌓 तिथि
त्रयोदशी
⭐ नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी
🔯 योग
ब्रह्म
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परिचय धनतेरस
परिचय

धनतेरस

भागवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार

धनतेरस को धन्वन्तरि त्रयोदशी भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन परिवार देवताओं के वैद्य भगवान धन्वन्तरि का स्मरण करते हैं। उनकी कथा क्षीरसागर के महान मन्थन से जुड़ी है।

विष्णु पुराण बताता है कि देवताओं का बल कैसे क्षीण हुआ। महर्षि दुर्वासा ने इन्द्र को एक सुगन्धित माला दी। इन्द्र ने उसे अपने हाथी ऐरावत के मस्तक पर रख दिया, और हाथी ने उसे सूँड से उठाकर भूमि पर गिरा दिया। दुर्वासा ने इसे अपना अपमान माना और इन्द्र को शाप दिया कि तीनों लोकों पर उनका राज्य नष्ट हो जाएगा। तभी से लोकों का तेज जाता रहा। वनस्पतियाँ सूख गईं और यज्ञ बन्द हो गए। दैत्यों ने आक्रमण करके देवताओं को पराजित कर दिया।

देवता ब्रह्मा जी के पास गए, और ब्रह्मा जी उन्हें भगवान विष्णु के पास ले गए। विष्णु ने उनसे कहा कि क्षीरसागर में औषधियाँ डालकर उसका मन्थन करो, मन्दराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाओ। उन्होंने देवताओं से कहा कि दैत्यों से सन्धि करके उनके साथ मिलकर यह परिश्रम करो। स्वयं विष्णु ने कच्छप का रूप धारण किया और पर्वत को अपनी पीठ पर थाम लिया।

मथे जाते हुए सागर से अनेक अद्भुत वस्तुएँ प्रकट हुईं। फिर एक युवा पुरुष निकले, बलवान और श्यामवर्ण, लम्बी भुजाओं और कुछ लाल नेत्रों वाले। वे पीताम्बर, माला और मोतियों के कुण्डल धारण किए हुए थे और सुन्दर आभूषणों से सजे थे। उनके हाथ में अमृत से लबालब भरा कलश था, अमरता देने वाला अमृत। ये धन्वन्तरि थे। भागवत पुराण कहता है कि वे स्वयं भगवान विष्णु के अंश थे, आयुर्वेद के आचार्य थे, और देवता के रूप में उन्हें यज्ञ के भाग में हिस्सा मिला। विष्णु पुराण उनका वर्णन श्वेत वस्त्र धारण किए, अमृत का पात्र लिए हुए करता है।

अमृत देखकर दैत्यों ने बलपूर्वक कलश छीन लिया। तब विष्णु ने एक सुन्दर स्त्री का रूप धारण किया, उनसे कलश वापस लिया और अमृत देवताओं को पिला दिया। बल पाकर देवताओं ने दैत्यों को हराया, और तीनों लोक फिर से समृद्ध हो गए।

इसीलिए धन्वन्तरि को आरोग्य देने वाले के रूप में स्मरण किया जाता है, जो देवताओं की औषधि लेकर सागर से प्रकट हुए।

एक और कथा

यह वह कथा है जो धनतेरस मनाने वाले परिवारों में परम्परा से कही जाती है; इसका कोई पुराण स्रोत नहीं मिला। यह इस सन्ध्या को यमराज के लिए दीप जलाने का कारण बताने के लिए कही जाती है।

राजा हिम का सोलह वर्ष का एक पुत्र था। उसकी कुण्डली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु होगी। राजकुमार का विवाह हुआ, और उस चौथी रात उसकी नवविवाहिता पत्नी ने उसे सोने नहीं दिया। उसने अपने कक्ष के द्वार पर अपने आभूषण और सोने चाँदी के बहुत से सिक्कों का ढेर लगा दिया, और द्वार तथा कमरों के चारों ओर दीप जला दिए। फिर वह उसके पास बैठकर रात भर कहानियाँ सुनाती और गीत गाती रही, ताकि वह जागता रहे।

मृत्यु के देवता यमराज सर्प का रूप धरकर द्वार पर आए। उजले दीपों और चमकते सोने से उनकी आँखें चौंधिया गईं, और वे भीतर नहीं जा सके। वे वहीं बैठकर उसकी कहानियाँ और गीत सुनते रहे, और रात बीतने पर चले गए। राजकुमार जीवित रहा।

परिवार कहते हैं कि इसी कारण इस दिन यमराज के लिए दीप जलाए जाते हैं, और इसी कारण यह दिन सोने चाँदी से जुड़ा है।

परंपरा और विधि
🏅
धनतेरस की खरीदारी
धनतेरस पर सोना, चाँदी, पीतल, या ताँबे की वस्तुएँ खरीदना सबसे लोकप्रिय आधुनिक परंपरा है। एक चाँदी का सिक्का या छोटा बर्तन खरीदना भी लक्ष्मी का आशीर्वाद आमंत्रित करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
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धन्वंतरि जयंती
भगवान धन्वंतरि (चिकित्सा और आयुर्वेद के देवता) का इस दिन सम्मान किया जाता है। डॉक्टर, फार्मासिस्ट, और आयुर्वेद वैद्य ब्रह्मांड के दिव्य वैद्य के रूप में उनकी पूजा करते हैं।
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प्रदोष काल पूजा
लक्ष्मी पूजा का समय प्रदोष काल पर रखना अनिवार्य है: सूर्यास्त के बाद की संध्या धुंधलके की अवधि। इस अवधि में देवी पृथ्वी पर जगमगाते, स्वच्छ, और स्वागतयोग्य घरों की तलाश में विचरण करती हैं।
💀
यम दीपम
धनतेरस की रात, असामयिक मृत्यु को दूर रखने के लिए घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा (यमराज की दिशा) की ओर मुख करके एक दीपक रखा जाता है। परिवार के सभी सदस्यों की सुरक्षा के लिए यमराज को एक छोटी प्रार्थना अर्पित की जाती है।
🎁
उपहार और नई वस्तुएँ
परिवार परंपरागत रूप से धनतेरस पर नए बर्तन, उपकरण, या वाहन खरीदते हैं। मूल सिद्धांत यह है: आज जो भी प्राप्त किया जाता है, वह बढ़ता है और घर में बना रहता है, ऐसा माना जाता है।
🌺
रंगोली और दीये
दीयों (तेल के दीपकों) की पंक्तियाँ दहलीज़ों, खिड़कियों, और छतों पर सजाई जाती हैं। प्रवेश द्वार पर सोने और लाल रंग में भव्य रंगोली बनाई जाती है: लक्ष्मी को भीतर आने का एक दृश्यमान निमंत्रण।
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