धनतेरस 2119
अमांत आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी): धन्वंतरि जयंती और लक्ष्मी पूजा
अन्य नाम: धनत्रयोदशी
स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल: 07:18:11 PM – 09:08:23 PM.
धनतेरस🗓 अक्तूबर 31, 2119🔔 धनतेरस, यम दीप दान, 🔱 प्रदोष, गुरु राशि परिवर्तन, भौम प्रदोष🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): अक्तूबर/31 07:18:11 PM – अक्तूबर/31 09:08:23 PM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | अक्तूबर/31 09:34:59 AM | अक्तूबर/31 11:59:32 AM |
| कुंभ | अक्तूबर/31 03:29:25 PM | अक्तूबर/31 04:42:57 PM |
| वृषभ | अक्तूबर/31 07:18:11 PM | अक्तूबर/31 09:08:24 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | अक्तूबर/31 11:57:05 AM | अक्तूबर/31 01:15:47 PM |
| लाभ | अक्तूबर/31 08:12:03 PM | अक्तूबर/31 09:53:29 PM |
| शुभ | अक्तूबर/31 11:34:55 PM | नवम्बर/1 01:16:21 AM |
| अमृत | नवम्बर/1 01:16:21 AM | नवम्बर/1 02:57:47 AM |
| चल | नवम्बर/1 02:57:47 AM | नवम्बर/1 04:39:14 AM |
नरक चतुर्दशी / काली चौदस🗓 नवम्बर 1, 2119🔔 हनुमान जयंती, नरक चतुर्दशी, काली चौदस, मास शिवरात्रि🕉 अभ्यंग स्नान (तेल स्नान, चंद्रोदय → सूर्योदय): 07:31:52 AM – 08:02:06 AM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)🗓 नवम्बर 2, 2119🔔 दीपावली, अमावस्या तर्पण, अन्वाधान🕉 स्थिर लग्न सहित प्रदोष काल (वृषभ स्थिर लग्न): नवम्बर/2 07:10:19 PM – नवम्बर/2 09:00:32 PM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नवम्बर/2 09:27:07 AM | नवम्बर/2 11:51:41 AM |
| कुंभ | नवम्बर/2 03:21:33 PM | नवम्बर/2 04:35:05 PM |
| वृषभ | नवम्बर/2 07:10:19 PM | नवम्बर/2 09:00:32 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| चल | नवम्बर/2 12:13:14 PM | नवम्बर/2 01:15:44 PM |
| लाभ | नवम्बर/2 01:15:44 PM | नवम्बर/2 02:33:51 PM |
| शुभ | नवम्बर/2 05:10:06 PM | नवम्बर/2 06:28:13 PM |
| अमृत | नवम्बर/2 06:28:13 PM | नवम्बर/2 08:10:14 PM |
| चल | नवम्बर/2 08:10:14 PM | नवम्बर/2 09:52:15 PM |
| लाभ | नवम्बर/3 01:16:18 AM | नवम्बर/3 02:58:19 AM |
| शुभ | नवम्बर/3 04:40:20 AM | नवम्बर/3 06:22:21 AM |
| अमृत | नवम्बर/3 06:22:21 AM | नवम्बर/3 08:04:22 AM |
गुजराती नववर्ष / बलि प्रतिपदा🗓 नवम्बर 3, 2119🔔 गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा, गुजराती नव वर्ष, विंछुड़ो शुरू नवम्बर/4 12:02:52 AM, इष्टि🕉 चल चौघड़िया (मिति मुहूर्त): नवम्बर/3 08:04:22 AM – नवम्बर/3 09:22:12 AM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| स्थिर लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| वृश्चिक | नवम्बर/3 09:23:11 AM | नवम्बर/3 11:47:45 AM |
| कुंभ | नवम्बर/3 03:17:37 PM | नवम्बर/3 04:31:10 PM |
| वृषभ | नवम्बर/3 07:06:24 PM | नवम्बर/3 08:56:36 PM |
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| चल | नवम्बर/3 08:04:22 AM | नवम्बर/3 09:22:12 AM |
| अमृत | नवम्बर/3 10:50:25 AM | नवम्बर/3 11:57:53 AM |
| शुभ | नवम्बर/3 01:15:43 PM | नवम्बर/3 01:36:28 PM |
| शुभ | नवम्बर/3 02:17:59 PM | नवम्बर/3 02:33:33 PM |
| चल | नवम्बर/3 05:09:14 PM | नवम्बर/3 06:27:04 PM |
| लाभ | नवम्बर/3 09:51:40 PM | नवम्बर/3 11:33:59 PM |
| शुभ | नवम्बर/4 01:16:17 AM | नवम्बर/4 02:58:35 AM |
| अमृत | नवम्बर/4 02:58:35 AM | नवम्बर/4 04:40:54 AM |
| चल | नवम्बर/4 04:40:54 AM | नवम्बर/4 06:23:12 AM |
यम द्वितीया / भैया दूज🗓 नवम्बर 4, 2119🔔 यम द्वितीया / भाई दूज🕉 अपराह्ण काल: नवम्बर/4 02:17:46 PM – नवम्बर/4 04:21:51 PM▸ अधिक मुहूर्त और पूर्ण पंचांग के लिए टैप करें
| चौघड़िया | से | तक |
|---|---|---|
| शुभ | नवम्बर/4 09:28:14 AM | नवम्बर/4 10:40:37 AM |
| चल | नवम्बर/4 01:15:43 PM | नवम्बर/4 02:33:16 PM |
| अमृत | नवम्बर/4 03:50:49 PM | नवम्बर/4 05:08:23 PM |
| लाभ | नवम्बर/4 06:25:56 PM | नवम्बर/4 08:08:31 PM |
| शुभ | नवम्बर/4 09:51:07 PM | नवम्बर/4 11:33:42 PM |
| अमृत | नवम्बर/4 11:33:42 PM | नवम्बर/5 01:16:17 AM |
| चल | नवम्बर/5 01:16:17 AM | नवम्बर/5 01:58:53 AM |
| लाभ | नवम्बर/5 05:24:03 AM | नवम्बर/5 07:06:39 AM |
परिचय धनतेरस
धनतेरस
भागवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार
धनतेरस को धन्वन्तरि त्रयोदशी भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन परिवार देवताओं के वैद्य भगवान धन्वन्तरि का स्मरण करते हैं। उनकी कथा क्षीरसागर के महान मन्थन से जुड़ी है।
विष्णु पुराण बताता है कि देवताओं का बल कैसे क्षीण हुआ। महर्षि दुर्वासा ने इन्द्र को एक सुगन्धित माला दी। इन्द्र ने उसे अपने हाथी ऐरावत के मस्तक पर रख दिया, और हाथी ने उसे सूँड से उठाकर भूमि पर गिरा दिया। दुर्वासा ने इसे अपना अपमान माना और इन्द्र को शाप दिया कि तीनों लोकों पर उनका राज्य नष्ट हो जाएगा। तभी से लोकों का तेज जाता रहा। वनस्पतियाँ सूख गईं और यज्ञ बन्द हो गए। दैत्यों ने आक्रमण करके देवताओं को पराजित कर दिया।
देवता ब्रह्मा जी के पास गए, और ब्रह्मा जी उन्हें भगवान विष्णु के पास ले गए। विष्णु ने उनसे कहा कि क्षीरसागर में औषधियाँ डालकर उसका मन्थन करो, मन्दराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाओ। उन्होंने देवताओं से कहा कि दैत्यों से सन्धि करके उनके साथ मिलकर यह परिश्रम करो। स्वयं विष्णु ने कच्छप का रूप धारण किया और पर्वत को अपनी पीठ पर थाम लिया।
मथे जाते हुए सागर से अनेक अद्भुत वस्तुएँ प्रकट हुईं। फिर एक युवा पुरुष निकले, बलवान और श्यामवर्ण, लम्बी भुजाओं और कुछ लाल नेत्रों वाले। वे पीताम्बर, माला और मोतियों के कुण्डल धारण किए हुए थे और सुन्दर आभूषणों से सजे थे। उनके हाथ में अमृत से लबालब भरा कलश था, अमरता देने वाला अमृत। ये धन्वन्तरि थे। भागवत पुराण कहता है कि वे स्वयं भगवान विष्णु के अंश थे, आयुर्वेद के आचार्य थे, और देवता के रूप में उन्हें यज्ञ के भाग में हिस्सा मिला। विष्णु पुराण उनका वर्णन श्वेत वस्त्र धारण किए, अमृत का पात्र लिए हुए करता है।
अमृत देखकर दैत्यों ने बलपूर्वक कलश छीन लिया। तब विष्णु ने एक सुन्दर स्त्री का रूप धारण किया, उनसे कलश वापस लिया और अमृत देवताओं को पिला दिया। बल पाकर देवताओं ने दैत्यों को हराया, और तीनों लोक फिर से समृद्ध हो गए।
इसीलिए धन्वन्तरि को आरोग्य देने वाले के रूप में स्मरण किया जाता है, जो देवताओं की औषधि लेकर सागर से प्रकट हुए।
एक और कथा
यह वह कथा है जो धनतेरस मनाने वाले परिवारों में परम्परा से कही जाती है; इसका कोई पुराण स्रोत नहीं मिला। यह इस सन्ध्या को यमराज के लिए दीप जलाने का कारण बताने के लिए कही जाती है।
राजा हिम का सोलह वर्ष का एक पुत्र था। उसकी कुण्डली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु होगी। राजकुमार का विवाह हुआ, और उस चौथी रात उसकी नवविवाहिता पत्नी ने उसे सोने नहीं दिया। उसने अपने कक्ष के द्वार पर अपने आभूषण और सोने चाँदी के बहुत से सिक्कों का ढेर लगा दिया, और द्वार तथा कमरों के चारों ओर दीप जला दिए। फिर वह उसके पास बैठकर रात भर कहानियाँ सुनाती और गीत गाती रही, ताकि वह जागता रहे।
मृत्यु के देवता यमराज सर्प का रूप धरकर द्वार पर आए। उजले दीपों और चमकते सोने से उनकी आँखें चौंधिया गईं, और वे भीतर नहीं जा सके। वे वहीं बैठकर उसकी कहानियाँ और गीत सुनते रहे, और रात बीतने पर चले गए। राजकुमार जीवित रहा।
परिवार कहते हैं कि इसी कारण इस दिन यमराज के लिए दीप जलाए जाते हैं, और इसी कारण यह दिन सोने चाँदी से जुड़ा है।
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