भड़ली नवमी 2027
आषाढ़ शुक्ल नवमी, चातुर्मास से पहले का अबूझ मुहूर्त
भड़ली नवमी
भड़ली नवमी (भड़रिया नवमी, कंदर्प नवमी) आषाढ़ शुक्ल नवमी है। यह आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन है, और इसके दो दिन बाद देवशयनी एकादशी आती है, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास आरंभ होता है।
मुहूर्त ग्रंथ विष्णु के शयन के महीनों में विवाह नहीं रखते, इसलिए देवशयनी एकादशी से कार्तिक की देवउठनी एकादशी तक विवाह नहीं होते। इसी से भड़ली नवमी चातुर्मास से पहले विवाह का अंतिम दिन है। उत्तर गुजरात और राजस्थान में इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है: पुरानी परंपरा के अनुसार इस दिन विवाह, सगाई या गृह प्रवेश के लिए अलग मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, और गुप्त नवरात्रि रखने वाले नवमी की देवी पूजा से उसका समापन करते हैं।
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